CONCEPT OF GOD

we want to know the reality of god. whether really god exists, or this is simply our perception.

In fact god nowhere exists nor have any presence, in universe. only the nature exists and it is nature, which controls the universe.

 

In other words,we can say, nature is god or super power who runs and controls the power.

God as described in religous books, a fraudulant character and is created by humans ,just to fool its followers

Changing social structure

In India now social structure is changing gradually, there were days when political supremacy was dominated by forward caste people only and politicians of OBC and sc ,st classes were simply tailenders or just followers.

No one even could think of becoming CM,PM from these classes

Then came jp movement,which produced youth leadership from all classes of society and these leaders brought a revolution post emergency

When Janata party came to power in states, obc leaders like karpoori thakur, ram naresh yadav got chief minister ship in their states.

In eighties when Congress used to rule in most of states, there was a undeclared rule about selection of chief minister e.g. if CM of up is from rajput community, CM of Bihar would be from Brahmin community and vice-versa, same theory was being applied in other states also

There was no consideration of place for obc or dalit community leaders

The jp movement and there on Janata party rule changed the trend upto some extent.

Then came kanshiram’s social justice movement, which changed the political scenerio , completely.

First he created awareness among downtrodden class about their rights and gradually inspired to wisdom of ruling, his movement put big impact on Indian politics, and people started thinking of other classes also.

Mayavati, became an ice breaker in up politics for dalits after becoming Chief minister , which became a milestone for dalit politics, now there are so many OBC and dalit CM in country, which no one could even think of, till eighties.

देश सेवा का मार्ग

प्लेटो ने एक स्थान पर लिखा है कि -’किसी देश का इससे अधिक सौभाग्य क्या हो सकता है कि उसमें श्रेष्ठ आचरण वाले स्त्री पुरुषों का बाहुल्य हो।’ कवि बाल्ट व्हाइट मैन का कथन है कि-’किसी देश की महत्ता उसके ऊँचे भवनों, शिक्षालयों, सम्पत्ति कोषों से नहीं हो सकती। बलवान् और चरित्रवान् व्यक्ति ही अपने देश को महान बना सकते हैं। वह बड़ा ही भाग्यशाली राष्ट्र है, जिसके निवासी उच्च आचरण को अपना आदर्श मानते हों। जर्मनी के भाग्य विधाता हिटलर ने एक स्थान पर लिखा है-हमारे देश को निर्बल स्वास्थ्य वाले धुरन्धर विद्वानों की अपेक्षा ऐसे व्यक्तियों की अत्यधिक आवश्यकता है, जो भले ही कम पढ़े लिखे हों परन्तु वे स्वस्थ हों, सदाचारी हों, आत्म विश्वासी हों और दृढ़ इच्छा शक्ति वाले हों।’

देश की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि हम उच्च आचरण वाले, निर्भीक, साहसी सदाचारी और स्वस्थ मनुष्यों की संख्या बढ़ावें। सुख, स्वराज्य, सुशासन तब तक किसी देश में स्थिर नहीं रह सकता, जब तक कि वहाँ के निवासी मानवोचित गुणों वाले न हों, वे मानवता का उत्तरदायित्व अनुभव न करते हों। निर्बलता, कायरता, भीरुता, छल, पाखंड और प्रवंचना का जब तक जोर रहेगा, तब तक दासता और दुर्भाग्य हमारा पल्ला नहीं छोड़ सकते। महात्मा गाँधी का कथन है कि “शारीरिक और मानसिक स्वस्थता की आवश्यकता जो लोग अनुभव करते हों और जो अपने को सब दृष्टियों से बलवान बनाने के लिये निरंतर प्रयत्नशील रहें, ऐसे ही देश सेवकों की भारत माता को आवश्यकता है।

FEAR OF DEATH

मृत्यु का
भय छोड़ दीजिए।

बालक
मरें, चाहे जवान या
बूढ़े मरें, हम इससे
भयभीत क्यों हों? कोई पल
ऐसा नहीं
जाता जब इस जगत में कही
किसी का जन्म और कही
किसी की मृत्यु होती
है। पैदा
होने पर खुशियाँ मनाना
और मौत से डरना बड़ी
मूर्खता है, यह बात हमें
अवश्य
सदैव अनुभव करनी
चाहिए। जो लोग आत्मवादी
हैं, – और हममें कौन
हिन्दू,
मुसलमान या पारसी ऐसा
होगा जो आत्मा के
अस्तित्व को न मानता
होगा? – वे
जानते हैं कि आत्मा कभी
मरती नहीं।

यही नहीं, बल्कि जीवित
और मृत
समस्त प्राणी एक ही हैं,
उनके गुण भी एक ही हैं।
इस दशा में, जबकि जगत में

उत्पत्ति और लय पल पल-पर
होता ही रहता है, हम
क्यों खुशियाँ मनावें?
और किस
लिए शोक करें? सारे देश
को यदि हम अपना परिवार
मानें- देश में जहाँ
कहीं
किसी का जन्म हुआ हो, उसे
अपने यहाँ ही हुआ मानें-
तो कितने जन्मोत्सव
मनाइयेगा? देश में
जहाँ-जहाँ मौतें हों उन
सबके लिए यदि हम रोते
रहें तो
हमारी आँखों के आँसू
कभी बन्द ही न हों। यह
सोचकर हमें मृत्यु का
भय छोड़
देना चाहिए।

अन्य देशों की अपेक्षा
प्रत्येक भारतवासी
अधिक ज्ञानी,
अधिक आत्मवादी होने का
दावा रखता है, तिस पर भी
मौत के सामने जितने दीन
हम
हो जाते हैं उतने और लोग
शायद ही होते हों और
उनमें भी मेरा खयाल है
कि
हिन्दू लोग जितने अधीर
हो जाते हैं उतने भारत
के दूसरे लोग नहीं।
अपने यहाँ
किसी का जन्म होते ही
हमारे घरों में आनन्द
मंगल उमड़ पड़ता है और
जब कोई
मर जाता है तब इतना रोना
पीटना मचता है कि आस-पास
के लोग भी हैरान हो जाते
हैं। हमें इस अज्ञान
जन्य हर्ष शोक को छोड़
ही देना चाहिए।

🔶
प्रत्येक व्यक्ति एक
दर्पण है सुबह से सांझ
तक इस दर्पण पर धूल जमती
है.
जो मनुष्य इस धूल को
जमते ही जाने देते हैं,
वे दर्पण नहीं रह जाते.
और
जैसा स्वयं का दर्पण
होता है, वैसा ही ज्ञान
होता है. जो जिस मात्रा
में
दर्पण है, उस मात्रा में
ही सत्य उसमें
प्रतिफलित होता है।